मति खेलो होरी, जा वैरिन होली कों

मति खेलो होरी, जा वैरिन होली कों गिरधारी |
जरि गये नगर- गाँव सब, जरि गयी संस्कृति नालंदा वारी |
जरि गये प्रहलाद- आग में, बहन होलिका जरि गयी सारी |मति खेलो होरी ……
कितने जुल्म सहे? जुल्मी मनुवादी की बुद्धि गयी थी मारी |
कब तक अत्याचार सहेंगे? कब तक होगी इनकी ठेकेदारी |मति खेलो होरी ……
अब कौन मसीहा बनकर आयेगा बनेगा जो मेरा हितकारी |
यूपी चुनाव की सत्ता में परिवर्तन आया हारीं बहन हमारी |मति खेलो होरी ……
फिरि होंगे निर्बलों पर सबलों के अत्याचार से हम दुखारी |
संकीर्ण विचारों की तलवारों पर कुछ कर न सकेगी कटारी | मति खेलो होरी …..
कैसे बच पायेगी दबे- कुचले शोषित की मर्यादा जो है हारी |
अंसुअन धार बहेगी ‘गौतम’ जब तक खेलेंगे होली गिरधारी |मति खेलो होरी …..
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रामबाबू गौतम, न्यू जर्सी (अमेरिका)
मार्च ०२, २०१२

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